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Thursday, 15 November 2012

तुम वही हो

तुम वही हो 

सच्चा प्यार


सच्चा प्यार

हर जन्म सबको सच्चा प्यार कहाँ मिलता है
तेरी चाहत में तो उमर बीता ली मैंने
मुझको जाने कहाँ एहसास मेरे ले जाएँ 
समय के हाथों से एक साध चुरा ली मैंने
बसी रहती है मुझमें अनोखी खुशबू
तेरी यादों से हर एक साँस सजा ली मैंने
जिसकी बातों को सुन के बहुत रोया था
बस वही एक बात जमाने से छुपा ली मैंने
विश्वास अपने प्यार पर इतना है मुझे
मेंरी चाहत को जो देखा तो लौट आई हो
मेरे नैनों के नील सागर में तुम जो डूबी तो
कहीं जाना भी जो चाहा तो जां ना पाए हो
 रामनारायण सोनी 

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