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Monday, 11 January 2016

आँसू


आँसू


आँसू
तरह तरह के,
पर सभी खारे आँसू.

प्रेम के, ख़ुशी के आसू
रुदन के, विलाप के आँसू
कुटिलता के, मगरमच्छ के आँसू

प्रेम के, रुदन के गर्म हैं आँसू
पानी न समझ लेना मर्म है आँसू
ह्रदय भरे भावों से उगलता
तन-मन को भिंगो देता आँसू

अपनी जुबाँ में बोलते है आँसू
धडकनों का पता देते आँसू
अंतर के भेद खोलते आँसू
वेदना के उबलते आँसू
अपने संग हमें ले चलते है आँसू


अंचल में झेलता कोई आँसू 
अंजन को घोलता कोई आँसू 
करुणा से हमें डुबोता कोई आँसू 
दिल को गुदगुदाता कोई आँसू 
अंतस में उतरता कोई आँसू 
दिल के छाले बताता कोई आँसू
कोई साथ सिसकी भी लाता है आँसू
कोई प्रेम गंगा बहाता है आँसू
कोई भक्त मधुबन में बोता है आँसू
कोई दोस्त रिश्ते को धोता है आँसू

आँसू
तरह तरह के,
पर खरा ही होता है 
हर एक आँसू.

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खुले नयन से खुली दृष्टि से, खुले खुले मन के वातायन खुले हाथ से खुले द्वार जो संभव कर दे नया सृजन