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Saturday, 16 August 2014

मेरी आवाज सुनो




मेरी आवाज सुनो

दिल के सागर की गहराइयों पड़ी कुछ सीपियाँ जो तुमने चुन ली.…   
....


वह संग जो जिंदगी का  अज़ीम हिस्सा है  .... 

रूहें जो खुद बातें करती हैं , खिलखिलाती हैं   …










एक आवाज
जो सुतल की गहराइयों में छिपी रहती है;
उस आवाज को तुमने आज सदा दी है
वे भाव
जो केवल अनुभूत हो सकते हैं,
वे स्पर्श
जो तन्हाई में भी गुदगुदाते रहते हैं,
वे यादें
पता नहीं चल पाता है-
कि कब अतीत वर्तमान बन जाता है


हम कभी तनहा क्यों नहीं होते,
बल्कि तनहा हो कर हम और करीब होते हैं
वो तपिश
जो सिर्फ सुकून देती है
वह सुकून
जो जीवन को होने का आनंद देता है;
और लबरेज भरा भरा होने का एहसास देता है,
अधूरापन तो
तुमने हमसे छीन लिया है,
उमड़ घुमड़ कर आये भाव
इस कदर शोर मचा रहे हैं
कि एक लेश ही कह पा रहे हैं
मन का पखेरू
न जाने किस दिशा की और जा रहा था
वह तब  दिशा- दशा पा गया
जब वह
तुम्हारी उंगली थाम कर चल पड़ा
जिंदगी को मकसद मिला
तुम फिर मिले
यह सब
अकेले इस जन्म का तो नहीं हो सकता।


जब हम खामोश होते हैं
तो रूहें बोल पड़ती हैं
कभी-कभी हम ही नहीं समझ पाते हैं; 

कि क्या बातें हो गई
लेकिन जो कुछ घट जाता हैं
वह तन मन को तर-बतर कर जाता है
ये वे शब्द हैं
जो गीत नहीं बन पाये
लेकिन इनमें कहीं न कहीं सरगम रची बसी है
जो बिना साज के लहरियों पर फुदकने लगती है
मन उतावला हो उठता है;
अनंत आकाश को अपनी बाँहों में भींचने को 


मन गा उठता है------
केवल तुम,    हाँ केवल तुम 


https://www.youtube.com/watch?v=eBeEgvmFVCA
https://www.youtube.com/watch?v=nkegknVbmqM


तू ही हक़ीकत ख्वाब तू दरिया तू ही प्यास तू 
तू ही दिल के बेक़रारी तू सुकून तू सुकून

जौ में अब जब जिस जगह पाऊँ में तुझको उस जगह 
साथ हो के ना हूँ तू है रूबरू रूबरू
तू हुमसफर तू हुंकदम तू हमनवा मेरा
तू हुमसफर तू हुंकदम तू हमनवा मेरा

आ तुझे इन बाहों में भरके
और भी कर लून मैं करीब
टू जुड़ा हो तो लगे है 
आता जाता हर पल अजीब 

इस जहां है और ना होगा मुझसा कोई भी खुशनसीब
तूने मुझको दिल दिया है में हूँ तेरे सबसे करीब 
मैं ही तो तेरे दिल मैं हूँ मैं ही तो सासों में बसूं
तेरे दिल की धडकनो में मैं ही हूँ में ही हूँ

तू हुमसफर तू हमकदम तू हमनवा मेरा
तू हुमसफर तू हमकदम तू हमनवा मेरा 

कब भला अब ये वक़्त गुज़रे
कुछ पता चलता ही नहीं जब से मुझको तू मिला है 
होश कुछ भी अपना नहीं उफ्फ़ ये तेरी पलकें घनी सी 
चाव इन की है दिलनशीं

अब किसे डर धूप का है क्यूं की है ये मुझपे बीछी
तेरे बिना ना सांस लू तेरे बिना ना मैं जिऊँ
तेरे बिना ना एक पल भी रह सकू रे सकू

तू ही हक़ीकत ख्वाब तू दरिया तू ही प्यास तू 
तू ही दिल के बेक़रारी तू सुकून तू सुकून

तू ही हक़ीकत ख्वाब तू दरिया तू ही प्यास तू 
तू ही दिल के बेक़रारी तू सुकून तू सुकून

तू हुमसफर तू हुंकदम तू हमनवा मेरा

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