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Thursday, 24 April 2014

रूहें बोलती हैं


रूह बोलती है

            * आत्मा *

कौन कहता है कि- रूहें बोलती नहीं
हम सुनें न सुनें, रूहें बोलती है

रूह सदा सच बोलती है
सच वही है जो सदा से है, आज भी है, रहेगा भी
रूहें  सदा रहती है इसलिए सबसे बड़ी गवाह है
रूहों को झूँठ बोलना नहीं आता
रूहों के बोल जगत के जाल में फँस कर
झूँठ बन कर रह जाते हैं
इसलिए रूहों को बोलते ही सुन लो
सुन लो और गुन लो,
हार तो जीत का पहला सोपान है
इसलिए जीत से बड़ी हार है

कौन कहता है कि- रूहें बोलती नहीं
हम सुनें न सुनें, रूहें बोलती है
                     *                ’
कौन कहता है कि- रूहें सुनती नहीं
कोई कहे न कहे, रूहें सुनती हैं

रूहों में ज्ञान हो कि न हो भान होता ही है
वे आवाज नहीं भाव सुनती है
क्योंकि आवाज तो भाव की देह है
रूहों के भाव शब्द-रूप धरते हैं
जितने गहरे से उठते हैं, उतने गहरे जाते हैं
रूहों में सच सुनने की सामर्थ्य है
क्योंकि सच को सुनना अदम्य साहस है
रूहों में साहस से ही धृति है , धृति से ही धर्म है 

कौन कहता है कि- रूहें सुनती नहीं
कोई कहे न कहे, रूहें सुनती है
                       *
कौन कहता है कि रूहें बात नहीं करती
कोई बात करे न करे रूहें बात करती है

रूहों के द्वार नहीं होते
खिड़कियों से ही सम्प्रेषण होता है
खिड़कियां कभी बंद नहीं होती
खिड़कियों से अंदर बाहर सब दिखता है
जस का तस , कोई घाल-मेल नहीं
रूहों के संवाद की न कोई भाषा न कोई लिपि
इसलिए रूहों की भाषा मौन है
भावों का आरोह अवरोह इस का संगीत है
न साज न आवाज, फिर भी गीतो की गुन-गुन
रूह से रूह कहती है, रूह को रूह सुनती है
रूह में कोई शोध नहीं, वहाँ बोध ही बोध है
रूह तो पद्म पत्र है, न जल चिपका है-न अलग है
रूहों का कोई नाम नहीं, फिर भी पहचान बड़ी है 
                             *
कौन कहता है कि रूहें बात नहीं करती
कोई बात करे न करे रूहें बात करती है

कौन कहता है कि रूहें नहीं रहतीं
हम रहें न रहें, रूहें रहती हैं 

रूहें हमें पहनती हैं, ओढ़ती है, चलाती है,
रूहें न जलती हैं न जलाती है, न सोंखती है न सुखाती है  
लेकिन, रूहें मिलती है, मिलाती है 
आती है तो जगाती है, जाती है तो सुलाती है 
रूह है तो हम हैं, रूह है तो सब है 
सब में बसी जो रूह है, जिंदगी बस रूह है 
उस की तलब है तो जिंदगी गजब है 
उसका उजास है तो जिंदगी में साँस है 
उसके बगैर बाँक है, और जिंदगी बस ढाक है 
रूहें रहें कहीं भी फिर भी वे पास-पास हैं
करुणा रहे बरसती ये उसका विलास है
कौन कहता है कि रूहें फिर-फिर मिलती नहीं है

कौन कहता है  रूहें रहती नहीं है
हम रहें न रहें, रूहें रहती हैं 
                    *
           *परमात्मा *

जो तेरा है वो मेरा है,
जो सबका है वो अपना है
जगत में नूर उसका है
बिना उसके ये सपना है
रूहें मिले तो समझो, उसका कमाल है
रूहों की खैर रखना ,उसका जमाल है
रूहों कि मजलिसों में चर्चा हो इश्क का
उसके करम से अपनी, दुनिया रसाल है 

कौन कहता है कि- रूहें बोलती नहीं
कौन कहता है कि- रूहें सुनती नहीं
कौन कहता है कि- रूहें बात नहीं करती
कौन कहता है कि- रूहें नहीं रहतीं
कौन कहता है कि- रूहें फिर-फिर मिलती नहीं है


रामनारायण सोनी

Thursday, 3 April 2014

जो मैं कह नहीं पाया

जो मैं रुबरु कह नहीं पाता हूँ उसे मैने कुछ इस तरह लिखने का प्रयास किया है-


मेरे लिए तुम मासूम और खुली किताब की तरह हो,
     जिसमें निश्छल मन को मैं पढता हूं।  

तुम्हारी बातों में इतना सीधापन है
       जो मुझे बहुत भाता है।  

तुम्हारा सदैव मेरे लिए चिंतित रहना
       मुझे 'अपना' होने का एहसास कराता है। 

चाहे कोई भी सम/विषम स्थिति हो,
        तुम हर बात को सिर्फ अपने तक ही रखती हो। 

तुम मेरी हर तकलीफ की
        दवा बन जाती हो।  
 
तुम्हारा संग-
        मेरे अधूरेपन को पूरा करता है।  

तुम मेरी जिंदगी का-
       एक मृदुल एहसास हो।  
 
तुमने मेरी जिंदगी में-
       रोशनी भर दी है।  
 
हम एक-दूसरे की-
        प्रतिच्छाया बन गए हैं।  

तुमने मुझे प्यार के सही मायने सिखाए
        और जिंदगी को बेहतर ढंग से जीना सिखाया।

ये अटूट विश्वास ही है,
        ये मुहब्बत की लौ को जलाए रखता है।  

जब भी कभी मैं उदास होता हूं,
        तो तुम्हारा कंधा हमेशा मुझे सहारा देने के लिए मौजूद होता है। 
 
मेरी हर गैर जरूरी बात को भी तुम्हारा ध्यान से सुनना
        मुझ में एक नया एह्सास जगाता है। 

तुम्हारी प्यार भरी नजर-
         मेरी स्मृति से ओझल ही नहीं होती ।  

तुम्हारा स्नेह -
         मुझे एक परितोष का एहसास कराता है। 
 
तुम्हारे साथ बिताया गया हर पल-
          मेरी जिंदगी की बेशकीमती दौलत है;
          इसे सहेजने में असीम आनंद है।  
 
तुम्हारा मंदस्मित आनन-
         मेरे अन्तर को प्रफुल्लित कर देता है।  

तुम मेरे बिना कहे ही मेरी हर बात जाने कैसे समझ लेती हो,
         मैं जो कहना चाहता हूँ वहाँ तुम पहले से खड़ी होती हो। 
 
अनचाही परिस्थितियों में भी-
         तुम्हारी चाह कभी कम नहीं हुई,
         अब मेरे जीवन का हर पल तुम्हारे लिए है।  
 
तुमसे प्यार की अनगिनत वजहें हैं,

           पर तुमसे प्यार की अहम वजह यही है कि-

                तुम मेरी जिंदगी हो और मैं तुमसे असीम प्यार करता हूं।
                  तुम मेरी जिंदगी हो और मैं तुमसे असीम प्यार करता हूं।


रामनारायण सोनी 



मुझे विश्वास है

संकलन----
तुम पर विश्वास करती हूँ.......!!!
मैं निष्पक्ष,
निस्वार्थ हमेशा तुम्हारे साथ रहती हूँ.....             
इसलिए नही कि ...मैं  तुमसे केवल प्यार ही करती हूँ........
बल्कि इसलिए....तुम पर विश्वास  करती हूँ....
मैं तुम्हारी हर बात पर,
तुम्हारे किये हर फैसले के साथ रहती हूँ.....
इसलिए नही कि ...मैं  तुमसे केवल प्यार ही करती हूँ........
बल्कि इसलिए....तुम  कभी गलत नही होते हो....
मैं तुम पर विश्वास करती हूँ......
मैं तुम्हारे साथ रहती हूँ.
मोड़ चाहे कोई भी हो.....हालात चाहे कोई भी हो.....
मुश्किले हो.... नाकामिया मिले चाहे जितनी .....
मैं तुम्हारे साथ रहती हूँ.
इसलिए नही कि ...मैं  तुमसे केवल प्यार ही करती हूँ........
बल्कि इसलिए.....तुम्हे जीतना आता है.... 
मैं तुम पर विश्वास करती हूँ.....

मुझे विश्वास है कि....तुम समझोगे एक दिन,
खुद से अधिक जब हम किसी पर विश्वास करते है....
तभी हम उससे प्यार करते है.........

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