गीत बसन्ती
आँगन में उतरी बहार, बसन्ती फूल खिले।
सखि! गाओ सुमंगल गान, बेला झूम चले।।
चम्पा चमेली ने है माँडी रंगोली,
अँबुवे की डाली पे कोयल बोली,
पपिहे ने कानों में मिसरी है घोली,
टेसू-जुही मिल के करत ठिठोली,
महुए पे छाया खुमार, समीरन चंवर डुले।
आँगन में उतरी बहार, बसन्ती फूल खिले।
सखि! गाओ सुमंगल गान, बेला झूम चले।।
रागों ने छन्दों से रास रचाया,
फागों ने खुशबू का कीच मचाया,
शब्दों ने भावों का उबटन लगाया,
साजों-सुरों ने है अलख जगाया,
गीतों ने ओढ़ा सिंगार, रसिया आन मिले।
आँगन में उतरी बहार, बसन्ती फूल खिले।
सखि! गाओ सुमंगल गान, बेला झूम चले।।
रामनारायण सोनी
०४/०१/२०२०