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Tuesday, 12 September 2017

कुछ कहो ना

आओ.लिख डालें कुछ ऐसा
  स्याही सूखने के पहले
बाँट लें कुछ पल ऐसे
  हाथ के थमने से पहले।।

अभी है गुल भी गुलशन भी
  अंजुरी भर सुरभि पी लें
जला लें दीप नेहिले से
  तमी छाने के कुछ पहले।।

Saturday, 9 September 2017

बैसाखियाँ


शूल बन कर फूल भी चुभते रहे
अर्थ बिन जो शब्द थे मथते रहे
रश्मियाँ बन उर्मियाँ दलती रही
वे कनक घट विष भरे झरते रहे।।

इन कुहासों में घिरी अतिरंजनाएँ
है सिमटता मुट्ठियों में आसमां भी
हम बिखरते स्वप्न के अंबार में
चाहतों की ही किरच चुनते रहे।।

जिन्दगी बैसाखियों पर चल रही
चू गई संकल्पनाएँ क्षार बन कर
कोंपलें अर्पित हुई पतझार को
हम पिपासा ही लिये चलते रहे।।

Thursday, 7 September 2017

Dictionary

मैं हर रोज सोचता रहता हूँ...

The whole dictionary is a set of 26 letters and a few symbols but by arranging them it becomes a big volume.

A volume of set of expression, emotion, regulation , creations and, of course, emergency life events.

Even if, 25 letters can't complete a bible.

If you withdraw a single letter from your motivational and emotional  thoughts,
my work will be no where.

इसलिए तो

मेरी कृतियों से तुम निकल गए
तो उन २५-२६ अक्षरों को कौन पढ़ेगा।
तुम्हें अपने आपको देखना हो
तो मेरी रचनाओं में घूम कर चले जाना
यहाँ तुम ही तुम हो

Ramnarayan Soni.

आराधन

है आज शक्ति का आराधन
अपने शुभ संकल्प सबल होवें
ऊर्जा के कण कण मन मे
जीवन में सत्य प्रबल होवे
रोलियाँ छितरी छटा छबि छैल सी
काटती जो उर बसी सब वर्जनाएँ
हो सके तो रश्मियों को अतिमान देना।।

यह समय की रेख है
काल मेघ घिर चले
पवि-प्रहार साक्ष्य हैं
दर्पणों के टूटने से पहले
स्वयं को निहार लो।
प्रचण्ड वेग वायु है
इस धरा की धूम से
अस्मिता सँवार लो।।


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खुले नयन से खुली दृष्टि से, खुले खुले मन के वातायन खुले हाथ से खुले द्वार जो संभव कर दे नया सृजन