*

*
*

Saturday, 27 July 2019

छुप कर सह जाता हूँ

अपनी पीड़ा तुम में जब जब पाता हूँ
मन ही मन मैं और दुःखी हो जाता हूँ
इसीलिये अपने दुखते हुए व्रणों को
चुपचुप अपने में छुपकर सह जाता हूँ

मुस्कानों से ढँका छिपा यह दर्द मेरा
इन सांसों की राह कहीं ना खुल जाए
तेरी मन की इस फुलबगिया में जा
इसी वजह कोई तुषार ना पड़ जाए

मेरे खुले हृदय की हर इक धमनी में
पिघला सीसा संग रुधिर के घूम रहा
उठती गिरती इस जीवन की धारा में
महाकाल हर पल मेरा माथा चूम रहा

Monday, 22 July 2019

सूखी नदी

तुम नदी हो
एक बहती नदी
रुकोगी नही,
वापस मुड़ोगी भी नही
मैं खड़ा रहा
बाहें फैलाये
समुन्दर बन कर
कि तुम पहुँचोगी
जरूर एक दिन
मुझ तक

नयन अभी भी नीर भरे

करुणा की मेरी झोली में
केवल बासी दर्द भरे हैं
यह कैसा ही बौनापन है
हम हँसने में भी डरे हैं

अनजाने लोगों ने आकर
खुले व्रणों पर नमक धरे हैं
रात गई और प्रात हुई पर
नयन अभी भी नीर भरे हैं

ढली शाम और थके पाँव
विषदंशों के स्राव हरे हैं
हम निर्मम की इस बस्ती में
कितने बेबस आज घिरे हैं

आज इलाजों की मण्डी में
शातिर नश्तर बाज भरे है
कोई जिये मरे कोई भी
सौ सौ पाकिटमार भरे हैं

गुड़िया बन जाऊँ

देखता हूँ जब कभी
चहकते ठुमकते बच्चे को
उन्मुक्त खेलते हुए
जी करता है जी भर कर
वह बच्चा तुम हो जाओ
और मैं हो जाऊं
तुम्हारे हाथों की गुड़िया

सोचता हूँ कभी कभी
छिदी बिंधी बासुरी
बन कर के मैं
अधरों से लग जाऊँ
थोथापन यह है मेरा
एक फूँक से तुम्हारी
मैं रागों से भर जाऊँ

Friday, 19 July 2019

जिन्दगी के नजरिये


एक और शाम हो गई
एक और दिन ढल गया
इस जिन्दगी की किताब से
एक और पन्न्ना फट गया

एक और शाम हो गई
एक और दिन ढल गया
इस जिन्दगी की किताब में
एक और पन्न्ना जुड़ गया

एक और शाम आ गई
एक और दिन सँवर गया
इस जिन्दगी की किताब का
एक और पन्ना  निखर गया

एक शाम आज आई है
एक और दौर चल गया
ग़मों की इस किताब से
एक जाम फिर फिसल गया

एक शाम है धुआँ धुआँ
गगन पहन के गेरूआँ
इस जिंदगी की गोद में
है कँप रहा रुआँ रुआँ

एक और शाम हो गई
एक और दिन ढल गया
इस जिन्दगी की किताब को
किसी ने हौले से  छुआ

Monday, 15 July 2019

इश्क उग आया

वक्त की इस बड़ी इमारत में
दो पलों की दरार में
वह मधुर मुस्कान
अंकुरित हुए
पीपल के बीज की तरह
इश्क उग आया
नव कोंपलें सज गई
पौधा यह ...
...हमारा तुम्हारा

Blog Archive

About Me

My photo
खुले नयन से खुली दृष्टि से, खुले खुले मन के वातायन खुले हाथ से खुले द्वार जो संभव कर दे नया सृजन