जो मैं रुबरु कह नहीं पाता हूँ उसे मैने कुछ इस तरह लिखने का प्रयास किया है-
जिसमें निश्छल मन को मैं पढता हूं।
तुम्हारी बातों में इतना सीधापन है
जो मुझे बहुत भाता है।
तुम्हारा सदैव मेरे लिए चिंतित रहना
मुझे 'अपना' होने का एहसास कराता है।
चाहे कोई भी सम/विषम स्थिति हो,
तुम हर बात को सिर्फ अपने तक ही रखती हो।
तुम मेरी हर तकलीफ की
दवा बन जाती हो।
तुम्हारा संग-
मेरे अधूरेपन को पूरा करता है।
तुम मेरी जिंदगी का-
एक मृदुल एहसास हो।
तुमने मेरी जिंदगी में-
रोशनी भर दी है।
हम एक-दूसरे की-
प्रतिच्छाया बन गए हैं।
तुमने मुझे प्यार के सही मायने सिखाए
और जिंदगी को बेहतर ढंग से जीना सिखाया।
ये अटूट विश्वास ही है,
ये मुहब्बत की लौ को जलाए रखता है।
जब भी कभी मैं उदास होता हूं,
तो तुम्हारा कंधा हमेशा मुझे सहारा देने के लिए मौजूद होता है।
मेरी हर गैर जरूरी बात को भी तुम्हारा ध्यान से सुनना
मुझ में एक नया एह्सास जगाता है।
तुम्हारी प्यार भरी नजर-
मेरी स्मृति से ओझल ही नहीं होती ।
तुम्हारा स्नेह -
मुझे एक परितोष का एहसास कराता है।
तुम्हारे साथ बिताया गया हर पल-
मेरी जिंदगी की बेशकीमती दौलत है;
इसे सहेजने में असीम आनंद है।
तुम्हारा मंदस्मित आनन-
मेरे अन्तर को प्रफुल्लित कर देता है।
तुम मेरे बिना कहे ही मेरी हर बात जाने कैसे समझ लेती हो,
मैं जो कहना चाहता हूँ वहाँ तुम पहले से खड़ी होती हो।
अनचाही परिस्थितियों में भी-
तुम्हारी चाह कभी कम नहीं हुई,
अब मेरे जीवन का हर पल तुम्हारे लिए है।
तुमसे प्यार की अनगिनत वजहें हैं,
पर तुमसे प्यार की अहम वजह यही है कि-
तुम मेरी जिंदगी हो और मैं तुमसे असीम प्यार करता हूं।
तुम मेरी जिंदगी हो और मैं तुमसे असीम प्यार करता हूं।
रामनारायण सोनी

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