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Sunday, 5 February 2017

🌾🌺 ऋतुराज आया है 🌳🎄

🌾🌺 ऋतुराज आया है 🌳🎄

जागा मधुमास मधुर मन के अरण्य में
किसलय-कलिकाएँ बनती अनल बीज।
दग्ध हुआ शिशिर का वह सघन शीत
ले आया रसवन्ती रसधारा भी सरसिज।।

पगलाया पवन भी ले कर के गन्ध-भार
गदराई अमराई भरती सी मदमत्त धार।
आँगन में उपवन में वीथिन में कुंजन में
बिखरी मधुरस की रसना रसमय अपार।।

शैल बने कनक-श्रृंग स्वर्णिम सी ऊषा में 
पहन लिये पीत वसन अमलतास, सरसों ने ।
ढाँप लिया अग-जग को फूलों की चूनर ने 
फैलाई अगरु गंध जन-जीवन में ऋतुपति ने।।

नव पल्लव नवल लता ले कर के नव विहान
गुंफित अवगुंठित हो रचते सब नव वितान।
अलियों के वृंद-वृंद करते मिल वृन्दगान
मधुपरियाँ जी भर कर करती मकरन्द पान।।

निवेदक
रामनारायण सोनी

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