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Monday, 15 October 2012

मधुरास


















मधुरास  की मंजुल घडी है

मधुपुरी से मधुपरी को, पुष्प का न्योता मिला है
तब प्रणय की स्वामिनी का चल पड़ा यह सिलसिला है।
स्वाति के इक बूँद को यूँ , आज यह चातक मिला है
गड-गड़ाते मेघ नभ में, सन-सनन बहती पवन है।।

प्रीत की लेकर मथानी, याद का सागर मथें हम
छोड़ कर दम-शील सारे, प्यार निर्मल शुचि करें हम ।
गहन तम से जूझते इस दीप का सिंचन करें हम
प्रणय अभिलाष लेकर, प्यार की बातें करें हम।।

एहसास के सुन्दर नगर में, प्यार का उपवन सजा
मानिनी मन मौज में, मनुहार तेरी कर रहा ।
खोल दो सब गाँठ मन की, ये प्रीत की पावन कड़ी है
अंजुरी में पुष्प भर मधुरास की मंजुल घडी है।।

रामनारायण सोनी

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