*

*
*

Wednesday, 16 September 2015

क्योंकि तुम हो





















जिंदगी मे जो कुछ अच्छा है
इसलिये कि....
कि जो-जो मिले अच्छे मिले,
कुछ से हम मिले,
शेष उस परमात्मा की अनुकंपा से मिले।

और तुम ....
.... तुमको तो प्रभु  ने ,
खास मेरे लिये नवाजा है,
इसी लिये जिंदगी तरोताजा है,
जानता है वह जीने के लिये
साँस  का होना जरूरी है।

आकाश तो निखालिस खाली है
पर उसने अनगिनत आशाएँ भर डाली है
साँस भी इसकी फिजा मे भरी हवा से ही चलती है
जिंदगी इसीसे चलती है,
इसी आकाश में पलती है, फलती है

शायद तुम यह जानते नही !
इन सांसो को गौर से देखो,
इसमे तुम हो कि नहीं,
स्पन्दन तुम्हारा है कि नही,
सूँघ कर कहो वहीं से आयी  कि नहीं
ये धडकनो का हिसाब है कि नही
इनमे तुम्हारी स्मृतियों का अरमान है कि नही
तुम तलक पहुँच सके- ये प्यास है कि नही
महसूस करो इन्हें ये तुम्हारे आस-पास है कि नही

आशाएँ पकड मे आती नही है,
महज जिंदगी का खालीपन भरती है
बडा सा मेस्मेरिजम है
सुहावना, लुभावना-
जिंदगी इसीका हाथ पकड कर चल रही है
चलती ही चली जा रही है

इसलिये कि कही न कहीं तुम हो
हाथ मे अनपढी सी कोई लकीर
वो तो आस बाँध कर बैठी है
वरना तो मन है महज फकीर

जिंदगी का बीतते चले जाना
किसके बूते में  रोक पाना है 
पल दर पल जिंदगी में खर्च कर दिये,  
अबसे तुम पर खर्च किया जाना है

पल दर पल जिंदगी में खर्च कर दिये,  
अबसे तुम पर खर्च किया जाना है। 

…… रामनारायण सोनी 

No comments:

Post a Comment

About Me

My photo
खुले नयन से खुली दृष्टि से, खुले खुले मन के वातायन खुले हाथ से खुले द्वार जो संभव कर दे नया सृजन