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Thursday, 27 July 2017

सम्मान

सम्मान व्यक्ति का नहीं
विभूति का है, कृतित्व का है,
आराधन का है, आह्वान का है 
सिद्धि का है, साधना का है
धर्म का है, धृति का है

श्रम का है, समर्पण का है
मील के उन पत्थरों का है
जो पुरुषार्थ के फूटप्रिन्ट है
उन उपादानों, उद्यानों का है
जो जगत को सुगन्धित करते है

याद रहे! साधना अनन्त है
अतीत एक सुन्दर दर्पण है,
पर दर्प तुम्हें न हो जाए
भगीरथ कहीं ठहर न जाए
खुद अवतर की गई गंगा
उसे बहा न ले जाए

मंथन में पहले हलाहल है,
श्री के उपरान्त ही अमृत है
डर न जाएँ, बिखर न जाए
कहीं यह बात बिसर न जाए
रामनारायण सोनी

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