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Thursday, 7 September 2017

आराधन

है आज शक्ति का आराधन
अपने शुभ संकल्प सबल होवें
ऊर्जा के कण कण मन मे
जीवन में सत्य प्रबल होवे
रोलियाँ छितरी छटा छबि छैल सी
काटती जो उर बसी सब वर्जनाएँ
हो सके तो रश्मियों को अतिमान देना।।

यह समय की रेख है
काल मेघ घिर चले
पवि-प्रहार साक्ष्य हैं
दर्पणों के टूटने से पहले
स्वयं को निहार लो।
प्रचण्ड वेग वायु है
इस धरा की धूम से
अस्मिता सँवार लो।।


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खुले नयन से खुली दृष्टि से, खुले खुले मन के वातायन खुले हाथ से खुले द्वार जो संभव कर दे नया सृजन