तू पानी है
हल्दी हूँ मैं
घुल कर तुझमें
खो कर खुद ही
बस रंग छोड़ जाऊँगी
तू हथेली है
हिना हूँ मैं
रच कर तुझमें
लकीरों की छाँह में
बस छुप कर रह जाऊँगी
करुणा सागर तू
नन्ही इक बूँद मैं
डूब कर सागर में
न मैं रहूँ न मेरा कुछ
बस पानी रह जाऊँगी
रामनारायण सोनी

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