कोई तो भगीरथ है
जो उतार लाया
गंगा को स्वर्ग से
न तो मैं गंगा हूँ
न ही भगीरथ
कौन है वो
जो कर गया यह सब
बस एक अहसास है मुझे
बस एक अबोध सा बोध है
पर जो कुछ भी है
कितना सुन्दर है
कृपा का वर्षण है
तुम-हम बस भींगते रहें
रामनारायण सोनी
३०.११.२०२०

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