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Thursday, 15 November 2012

तुम वही हो

तुम वही हो 

सच्चा प्यार


सच्चा प्यार

हर जन्म सबको सच्चा प्यार कहाँ मिलता है
तेरी चाहत में तो उमर बीता ली मैंने
मुझको जाने कहाँ एहसास मेरे ले जाएँ 
समय के हाथों से एक साध चुरा ली मैंने
बसी रहती है मुझमें अनोखी खुशबू
तेरी यादों से हर एक साँस सजा ली मैंने
जिसकी बातों को सुन के बहुत रोया था
बस वही एक बात जमाने से छुपा ली मैंने
विश्वास अपने प्यार पर इतना है मुझे
मेंरी चाहत को जो देखा तो लौट आई हो
मेरे नैनों के नील सागर में तुम जो डूबी तो
कहीं जाना भी जो चाहा तो जां ना पाए हो
 रामनारायण सोनी 

Monday, 15 October 2012

कैसे इतना प्यार लिखूँ


कैसे इतना प्यार लिखूँ 

कैसे कुछ शब्दों में प्रियतम, इतना सारा प्यार लिखूँ 
सागर से नयनोँ पर अपना, यह सारा संसार लिखूँ 
विगत वेदना लिखूँ प्रिये या, मधुर मिलन का सर लिखूँ 
कैसे कुछ शब्दों में प्रियतम, इतना सारा प्यार लिखूँ 
सांसों का थमना लिखदूँ या, धड़कन का ये ज्वार लिखूँ 
स्वप्नों का अभिसार या, भावों का व्यापार लिखूँ 
कम्पित अधरों भार लिखूँ या, अन्तर की हुंकार लिखूँ 
कैसे कुछ शब्दों में प्रियतम, इतना सारा प्यार लिखूँ 
कुंठित वाणी का हाल लिखूँ या विगलित तन का जार लिखूँ
इस मन का उस मन पर अरु उस मन का इस मन पर
अधिकार लिखूँ, मनुहार लिखूँ, संचार लिखूँ, संवाद लिखूँ 
कैसे कुछ शब्दों में प्रियतम, इतना सारा प्यार लिखूँ 
तप्त धरा की प्यास लिखूँ या, मेघों का मल्हार लिखूँ 
गुमसुम वीणा के तार लिखूँ या, घुंघुरु की झंकार लिखूँ 
उपवन का पतझार लिखूँ या, पसरी बसंत बहार लिखूँ
कैसे कुछ शब्दों में प्रियतम इतना सारा प्यार लिखूँ 
विश्वास लिखूँ, अनुबंध लिखूँ, स्वीकार लिखूँ, गलहार लिखूँ

 क्रमश:  ........

मधुरास


















मधुरास  की मंजुल घडी है

मधुपुरी से मधुपरी को, पुष्प का न्योता मिला है
तब प्रणय की स्वामिनी का चल पड़ा यह सिलसिला है।
स्वाति के इक बूँद को यूँ , आज यह चातक मिला है
गड-गड़ाते मेघ नभ में, सन-सनन बहती पवन है।।

प्रीत की लेकर मथानी, याद का सागर मथें हम
छोड़ कर दम-शील सारे, प्यार निर्मल शुचि करें हम ।
गहन तम से जूझते इस दीप का सिंचन करें हम
प्रणय अभिलाष लेकर, प्यार की बातें करें हम।।

एहसास के सुन्दर नगर में, प्यार का उपवन सजा
मानिनी मन मौज में, मनुहार तेरी कर रहा ।
खोल दो सब गाँठ मन की, ये प्रीत की पावन कड़ी है
अंजुरी में पुष्प भर मधुरास की मंजुल घडी है।।

रामनारायण सोनी

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