*

*
*

Friday, 4 November 2016

इस दीवाली दिया धरें

एक दिया ऐसा भी हो,
जो भीतर तलक प्रकाश करे,
एक दिया कुण्ठित जीवन में
फिर आकर क़ुछ सुश्वास भरे
एक दिया सादा हो इतना,
जैसे सरल सन्त का जीवन,
एक दिया इतना सुन्दर हो,
जैसे देवों का हो उपवन

एक दिया जो भेद मिटाये,
क्या तेरा और क्या मेरा है,
एक दिया जो याद दिलाये,
हर रात के बाद सवेरा है
एक दिया उनकी खातिर हो,
जिनके घर कोइ दिया नहीं हो,
एक दिया उन बेचारों का,
जिनको घर ही दिया नहीं

एक दिया सीमा के रक्षक,
अपने वीर जवानों का
एक दिया मानवता - रक्षक,
चंद बचे इंसानों का हो !
एक जले आशा का दीपक,
जिनकी हिम्मत टूट गयी ,
एक दिया उस राह लगा हो ,
जो कल पीछे छूट गयी

एक दिया जो अंधकार का ,
जड़ के साथ विनाश करे ,

एक दिया ऐसा भी हो
जो सुख का संचार करे,
एक दिया ऐसा जरूर हो ,
भीतर तलक प्रकाश करे।

No comments:

Post a Comment

Blog Archive

About Me

My photo
खुले नयन से खुली दृष्टि से, खुले खुले मन के वातायन खुले हाथ से खुले द्वार जो संभव कर दे नया सृजन