*जीवन बहता पानी*
जीवन की सरिता
सरिता के तटबन्ध
तटबन्धों पर सटे सुहाने घाट
सरिता के तटबन्ध
तटबन्धों पर सटे सुहाने घाट
घाट साक्षी है -
जीवन प्रवाह के
साक्षी है धार के,
गुजरते पानी के,
चढ़ते उफान के,
झरते प्रपात के,
और जल की शीतलता के,
निर्मलता के, सरलता के
झरोखे इतिहास के
झरते प्रपात के,
और जल की शीतलता के,
निर्मलता के, सरलता के
झरोखे इतिहास के
तट हैं जन्म अौर मृत्यु
जीवन है सरिता
जीवन है सरिता
तटों के पार देखना,
प्रवाह के उद्गम को समझना,
बहने की ऊर्जा का परम स्रोत,
गन्तव्य (सागर) का प्रबोध
प्रवाह के उद्गम को समझना,
बहने की ऊर्जा का परम स्रोत,
गन्तव्य (सागर) का प्रबोध
जल का पुनः पुनः लौटना
फिर फिर बहना
प्रतिक्षण बदलती है सरिता
कहने को कहते हैं
'सरिता बहती है'
नहीं, बहता पानी है
कहने को कहते हैं
'सरिता बहती है'
नहीं, बहता पानी है
जीवन नहीं
समय के पल बहते हैं
उद्गम से पर्यवसान तक
नित्य, निरन्तर, अविरल
कल - कल छल - छल
बहने की चेतना
वह कभी नहीं मरती
बहते पलों के साक्षी ये तट
काल के माइल स्टोन हैं
गवाक्ष हैं
वह कभी नहीं मरती
बहते पलों के साक्षी ये तट
काल के माइल स्टोन हैं
गवाक्ष हैं
हमने आमने सामने के तटों को देखा
बाएँ से दायें बहते प्रवाह को,
उद्गम और पर्यवसान को,
जल के क्लोज साइकल को
न देख पाए
बाएँ से दायें बहते प्रवाह को,
उद्गम और पर्यवसान को,
जल के क्लोज साइकल को
न देख पाए
तो हम अधूरे है
जल का मैं कण हूँ,
यहाँ भी वहाँ भी
मैंने तट देखे, तट बन्ध देखे
श्वासों के अनुबन्ध देखे
उतार देखे, चढ़ाव देखे
मेरी खोज सागर है
बहता हूँ उस ओर
कहीं प्रपात हूँ
कहीं धार हूँ
पर मैं जल का कण हूँ
यहाँ भी वहाँ भी कहीं भी
यहाँ भी वहाँ भी
मैंने तट देखे, तट बन्ध देखे
श्वासों के अनुबन्ध देखे
उतार देखे, चढ़ाव देखे
मेरी खोज सागर है
बहता हूँ उस ओर
कहीं प्रपात हूँ
कहीं धार हूँ
पर मैं जल का कण हूँ
यहाँ भी वहाँ भी कहीं भी

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