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Monday, 27 November 2017

शब्द - धरा


शब्द जो जिन्दगी भर
साथ चलते है, जीते हैं
हाँ,  वे कभी मरते नहीं हैं
कुछ शब्द ऐसे होते हैं
जो आसमान को
मुट्ठी मे भर लेते हैं

कुछ शब्द ऐसे होते हैं
जो भावों का सागर
चुल्लू में समेट लेते हैं
कुछ शब्द ऐसे होते हैं
जो मेरे भीतर से चल कर
तेरे भीतर जाते हैं

कुछ शब्द ऐसे होते हैं
जो अन्धेरों को चीर कर
बुझे मन के दीप जला जाते हैं
कुछ शब्द ऐसे होते हैं
जो यादों के अंबार में से
खुद को, तुमको ढूँढ लाते है

कुछ शब्द ऐसे होते हैं
जो सूखे हृदय में से भी
करुणा, प्रेम, रस बहाते हैं
कुछ शब्द ऐसे होते हैं
वे न कहीं जाते है न आते हैं
मुझी में घर बना लेते हैं

कुछ शब्द ऐसे होते हैं
जब जब गिरता हूँ तो
प्यार से उठाते हैं
कुछ शब्द ऐसे होते हैं
जो हौले से आते हैं
डूबते दिल को थपकी दे जाते है

जैसे मैं, तू, तुम, हम, अपन
प्यार, करुणा, दुलार,
ये ऐसे ही कुछ शब्द होते हैं

और...
कुछ शब्द ऐसे होते हैं
जो जिन्दगी में तो रहते ही हैं
जिन्दगी के बाद भी रह जाते हैं

शब्द सिर्फ अक्षरों का मेल नहीं
भावों की रेल है
शब्द सिर्फ घावों की पीड़ा ही नहीं
मरहम की जेल है
शब्द सिर्फ ज्ञान का आधार नही
जीवन का खेल है
शब्द सिर्फ द्वन्द्व ही नहीं
सुकून का मेल है

अर्थों के, भावों के
इस पार, उस पार
जतन से कहीं धर लें
समय के पंछी के
चुगने से पहले

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खुले नयन से खुली दृष्टि से, खुले खुले मन के वातायन खुले हाथ से खुले द्वार जो संभव कर दे नया सृजन