भाव निर्झर, रूह की राहत, प्रेम और समर्पण
कमी जरूर होगी कहीं कि... तुम्हारी याद के सन्दूक से कपूर की तरह उड़ गया,
कतरा कतरा बिखर गया बिखर बिखर मैं देखता ही रहता हूँ बस तुम्हे ही
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