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Sunday, 27 October 2019

तमस दीप पर भारी है

है बौने दीप का साहस अँधेरी रात डरती है
भले हो कालिमा भारी अमावस भी सिहरती है।

अँधेरी आस्थाओं में भरम के तन्तु गलते हैं
प्रकट हो रोशनी के क्षण सभी दुःस्वप्न जलते हैं।

किरण का प्रस्फुटन ही विजय की नीव रखता है
तमस पर जीत की लिखी कहानी साथ रखता है

धरा की ओढ़नी में ये सितारे दीप के टाँके
सुहागन रात मस्ती में अहा! मधुकुञ्ज से झाँके

रंगोली मेरे आँगन की ये है प्रीत का परिमल
बताशे खील और धानी सजा इस साँझ का आँचल।

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खुले नयन से खुली दृष्टि से, खुले खुले मन के वातायन खुले हाथ से खुले द्वार जो संभव कर दे नया सृजन