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Sunday, 3 December 2017

नई किताब हूँ

पुरानी सी जिल्द में मढ़ी  एक नई किताब हूँ मैं
उम्मीद के तारों भरे आसमाँ में  एक महताब हूँ मैं
दो कदम चल सकूँ संग संग हमकदम हो कर मैं
पोशीदा, शोख, सतरंगी ऐसा ही एक ख्वाब हूँ मैं ।।

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खुले नयन से खुली दृष्टि से, खुले खुले मन के वातायन खुले हाथ से खुले द्वार जो संभव कर दे नया सृजन