पुरानी सी जिल्द में मढ़ी एक नई किताब हूँ मैं
उम्मीद के तारों भरे आसमाँ में एक महताब हूँ मैं
दो कदम चल सकूँ संग संग हमकदम हो कर मैं
पोशीदा, शोख, सतरंगी ऐसा ही एक ख्वाब हूँ मैं ।।
उम्मीद के तारों भरे आसमाँ में एक महताब हूँ मैं
दो कदम चल सकूँ संग संग हमकदम हो कर मैं
पोशीदा, शोख, सतरंगी ऐसा ही एक ख्वाब हूँ मैं ।।

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