मन की कोरी चादर पर कुछ स्वप्न धरे हैं
अधरों पर कुछ प्यास गुलाबी ले कर आना
नयनों की कोरों में श्यामल सांझ खिली हो
मदिर मदिर मौसम का मृदुहास लिये आना।
आज तूलिका अंतस के कुछ रंग भरे बैठी है
उसके प्राणों के रेशों से तुम हौले ख़ुद उतराना।
उलझे कुन्तल के वलय सभी उलझे उलझे हों
प्रखर प्रणय की संध्या के मधुमास लिये आना।।

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