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Monday, 15 July 2019

इश्क उग आया

वक्त की इस बड़ी इमारत में
दो पलों की दरार में
वह मधुर मुस्कान
अंकुरित हुए
पीपल के बीज की तरह
इश्क उग आया
नव कोंपलें सज गई
पौधा यह ...
...हमारा तुम्हारा

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खुले नयन से खुली दृष्टि से, खुले खुले मन के वातायन खुले हाथ से खुले द्वार जो संभव कर दे नया सृजन