मेरे प्रिय आत्मन्!
अकेला रह कर मैं
कुछ कह सकता हूँ
पर संवाद के लिये...
आप जरूरी हैं
कुछ कह सकता हूँ
पर संवाद के लिये...
आप जरूरी हैं
अकेला रह कर मैं
खुश हो सकता हूँ
पर उत्सव तो..
आपके बगैर असंभव है
खुश हो सकता हूँ
पर उत्सव तो..
आपके बगैर असंभव है
अकेला रह कर मैं
मुस्कुरा तो सकता हूँ
पर उल्लास तो...
कैसे उतरेगा मन में
मुस्कुरा तो सकता हूँ
पर उल्लास तो...
कैसे उतरेगा मन में
अकेला रह कर मेरी
साँसें तो चल जाती हैं
यह जिन्दगी तो
आपके बगैर अधूरी है
साँसें तो चल जाती हैं
यह जिन्दगी तो
आपके बगैर अधूरी है
रामनारायण सोनी

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