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Wednesday, 13 November 2019

आप हैं तो, हम है

मेरे प्रिय आत्मन्!
अकेला रह कर मैं
कुछ कह सकता हूँ
पर संवाद के लिये...
  आप जरूरी हैं
अकेला रह कर मैं
खुश हो सकता हूँ
पर उत्सव तो..
  आपके बगैर असंभव है
अकेला रह कर मैं
मुस्कुरा तो सकता हूँ
पर उल्लास तो...
  कैसे उतरेगा मन में
अकेला रह कर मेरी
साँसें तो चल जाती हैं
यह जिन्दगी तो
  आपके बगैर अधूरी है
      रामनारायण सोनी

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खुले नयन से खुली दृष्टि से, खुले खुले मन के वातायन खुले हाथ से खुले द्वार जो संभव कर दे नया सृजन