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Sunday, 6 December 2020

सुनो चुपचाप

मैं चुप हूँ
क्योंकि तुम
  अल्फाजों से नही
    अहसासों से समझ लेते हो
तुम चुप हो
  क्योंकि तुम
   बिना अलफ़ाजों के भी
    सब बयान कर जाते हो
हम चुप रह कर
  कितना बोलते हैं
   है ना?

रामनारायण सोनी
३०.११.२०

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खुले नयन से खुली दृष्टि से, खुले खुले मन के वातायन खुले हाथ से खुले द्वार जो संभव कर दे नया सृजन