*

*
*

Thursday, 31 December 2020

अभी तक तुम नहीं आये


सखे! लौटा फिर मधुमास
शरद भर सिहरी पवन यह
फिर मलय की गंध ले आई
सुमन जागे, कामना जागी।
       अभी तक तुम नहीं आये।।

प्रीत के पाहुन मुखर हो
हो चले हैं फिर बटोही
इन अलिन्दों के नगर में
भ्रमर जागे, प्यास जागी।
        अभी तक तुम नहीं आये।।

कोकिला के कंठ जागे
वीतरागी गुल्म भी जागे
मधुपरी के दुःस्वप्न भागे
मीन की फिर आस जागी।
         अभी तक तुम नहीं आये।।

मेरे मन के नन्दन वन में
प्रीत का मधुरास जागा
रागिनी लय छ्न्द ले कर
सुर मुखर धर वेणु जागी।
          अभी तक तुम नहीं आये।।

हर दिशा हर कोण में है
मकरन्द के मदमस्त मेले
हर लता गलबाँह लेती
हर विटप की पीर भागी।
           अभी तक तुम नहीं आये।।

     रामनारायण सोनी
             25.11.20
                         

No comments:

Post a Comment

Blog Archive

About Me

My photo
खुले नयन से खुली दृष्टि से, खुले खुले मन के वातायन खुले हाथ से खुले द्वार जो संभव कर दे नया सृजन