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Tuesday, 13 February 2018

यहाँ प्रेम का मधु है

*यहाँ प्रेम का मधु है*

खुला निमन्त्रण सबको प्यारों...
मेरी मधुशाला में बन्दों
जरा तो आ कर देखो
यहाँ प्रेम का मधु है
बन्धन कैसा? किसका?
हर दिन प्रेम दिवस है

बस प्रेम ही प्रेम यहाँ है
यहँ "मैं" का भान कहाँ है
यहँ मैं नहीं केवल तुम हो
यहँ "मैं" का स्वयं विलय है
प्रेम पियाला छक कर पीना
"मैं" उसमें में घुल जाएगा

प्रेम निवाला खाओ दिल से
"मैं" खुद ही पच जाएगा
पाना प्यारे प्रेम नहीं है,
बस मिटना "मैं" का ही
मानो! पक्का प्रेम यही है
जितनी प्यास बढ़ेगी

उतने प्याले होंगे
मेरी प्रेम नगरिया ऐसी
बस पीने वाले होंगे
मेरी मधुशाला में बन्दों
जरा तो आ कर देखो
यहाँ प्रेम का मधु है..


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