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Wednesday, 29 January 2020

डरा हुआ

मैं अभी व्यस्त हूँ
तुमको, उसको,
किसी और को खोजने में

इस डर से कि
कहीं मुझे मैं न मिल जाऊँ
यहाँ प्रश्न अनेक मुझ में
धधक रहे हैं

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खुले नयन से खुली दृष्टि से, खुले खुले मन के वातायन खुले हाथ से खुले द्वार जो संभव कर दे नया सृजन