यह प्रदीप, ये नीहारिकाएँ
ये गुल्म और लताएँ
मन और सारी आशाएँ
ठहरे ठहरे और निष्प्राण हैं
अब लौट भी आओ शुभे!
मेरे उस महाप्रयाण से पहले
रामनारायण सोनी
२४.०९.२१
यह प्रदीप, ये नीहारिकाएँ
ये गुल्म और लताएँ
मन और सारी आशाएँ
ठहरे ठहरे और निष्प्राण हैं
अब लौट भी आओ शुभे!
मेरे उस महाप्रयाण से पहले
रामनारायण सोनी
२४.०९.२१
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