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Friday, 24 September 2021

दो लघु कविताएँ

पूछना है तो पूछो
इतिहास मेरा, तुम्हारा, उनका
इन कतरनों और पुर्जियों से
आइने तो बस
रनिंग कॉमेन्ट्री सुनाएँगे

रामनारायण सोनी
२३.०८.२१

तुमने कहा था
रहेगा तुम्हारा साया
साथ सदा ही मेरे
पर यहाँ तो और कुछ भी नहीं है
मेरी परछाइयों के सिवा

रामनारायण सोनी
२३.०८.२१


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खुले नयन से खुली दृष्टि से, खुले खुले मन के वातायन खुले हाथ से खुले द्वार जो संभव कर दे नया सृजन