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Tuesday, 13 June 2017

आतंकवाद

कौन है जो इन युवाओं में पलीते धर रहा
छीन कर पुरुषार्थ उनमें विप्लवों को बो रहा।
उन जड़ों की ठीक से पहिचान करनी चाहिए
क्यारियाँ केशर की उजड़ी नागफनियाँ धर रहा।।

वक्त है आह्वान का तुम शक्ति का संधान कर लो
अब कसो तूणीर उनमें रण विजय के तीर धर लो।
है धरा के ऋण चुकाने का समय अभिनव खड़ा
धार में अपने परशु को तीक्ष्ण करके आग भर लो।।

जो उठी है विष भरी संभावनाएँ अरिदलों में
शांति के उड़ते कपोतों को लहू से रंग रहे।
नष्ट कर दो ताकतों को जो अनर्गल हो रही
वे नहीं मानव जगत में हिंस्र कितने हो रहे।।

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खुले नयन से खुली दृष्टि से, खुले खुले मन के वातायन खुले हाथ से खुले द्वार जो संभव कर दे नया सृजन