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Wednesday, 18 July 2018

पास होते अगर तुम

पास होते
... अगर तुम
तो देख पाते
कैसे टूटता हूँ
हर रात और
फर्श पर बिखरी
पड़ी वे उम्मीदें

सुन पाते प्रतिध्वनियाँ
उन रुँधी - रुँधी
खामोशियों की

ले पाते खुशबू
हृदय-पुष्प की
बिखरी इन पंखुड़ियों की

पास होते
... अगर तुम

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खुले नयन से खुली दृष्टि से, खुले खुले मन के वातायन खुले हाथ से खुले द्वार जो संभव कर दे नया सृजन