जीवन भरा है
अपेक्षाओं से ठसाठस
यह भी वास्तविकता ही है।
दिखाई देता है जहाँ तक
सुझाई देता है जहाँ तक
उपलब्धियों को हम उलीचते हैं
फावड़े से मिट्टी की तरह
दीखता नहीं पीछे पड़ा ढेर
एक अपेक्षा को
एक और अपेक्षा चाहिए
अपेक्षाओं से खाली नहीं है जिन्दगी

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