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Monday, 2 July 2018

अहसासों का अहसास

मेरे इन अहसासों का
अहसास तुम्हे हो जाए तो
कह देना थोड़ा मुझ को भी
नम आँखों की नमी मेरी
नम कर दे तेरा हृदय कहीं
कह देना थोड़ा मुझ को भी
धड़कन मेरे इस दिल की
धड़कन में मिल न सके तेरे
कह देना थोड़ा मुझ को भी
बोल दिये कुछ अनगढ़ से
बोलों के भाव न भाए तो
कह देना थोड़ा मुझ को भी
गर हो न सका ऐसा कुछ
समझूँगा मुझ में कशिश नहीं
तो सहने दो थोड़ा मुझ को भी


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खुले नयन से खुली दृष्टि से, खुले खुले मन के वातायन खुले हाथ से खुले द्वार जो संभव कर दे नया सृजन