तुम्हारे स्नेह के अखूट खजाने से
मन के अवशोषित भावों की
उस सख्त चट्टान से मैने
मीठे सोते बहते देखे हैं
अतीत के सब्ज लम्हों से
कोई शब्द, कोई संदेश
देना चाहो अगर तो
दे दो अभी
जिसे रख लूँ गिरह में
अब मैं चुक रहा हूँ
प्रयाण के सर्ग
उत्सवी हो चले हैं
मृत्यु के उस पार तक
दिखा दूँगा तब भी
कि मेरी चिर प्रतीक्षा
अमृत पिये खड़ी है
वहाँ भी तुम्हारे हृदय की
दहलीज पर खड़ा मुझे पाओगे
रामनारायण सोनी

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