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Tuesday, 16 October 2018

गुरू की तलाश

चल चलें प्राची में
अरुणिम जीवन का
अनुसन्धान करें हम
ढूँढ ही लेगी मृत्यु हमे
इस क्षण चूके यदि हम

भव्य भवन है जीवन का
एक से एक सुन्दर
अट्टालिकाएँ, मेहराबें, कंगूरे
गेलरियाँ, एलीवेशन, रंग रोगन,
आलीशान है शोहरत
परन्तु...
अधूरा है सब
इन्टीरियर डेकोरेटर के बिना
वह गुरु करेगा
चलो..
"वरान्निबोधत"

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खुले नयन से खुली दृष्टि से, खुले खुले मन के वातायन खुले हाथ से खुले द्वार जो संभव कर दे नया सृजन