चल चलें प्राची में
अरुणिम जीवन का
अनुसन्धान करें हम
ढूँढ ही लेगी मृत्यु हमे
इस क्षण चूके यदि हम
भव्य भवन है जीवन का
एक से एक सुन्दर
अट्टालिकाएँ, मेहराबें, कंगूरे
गेलरियाँ, एलीवेशन, रंग रोगन,
आलीशान है शोहरत
परन्तु...
अधूरा है सब
इन्टीरियर डेकोरेटर के बिना
वह गुरु करेगा
चलो..
"वरान्निबोधत"

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