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Wednesday, 16 June 2021

जिन्दगी तीन पगों की

जिन्दगी तीन पगों की

जिन्दगी एक किताब है
सिर्फ कुछ पन्नों की
पहले पर लिखा है जन्म
   जन्म ढाई आखर ही का
आखिरी पर दर्ज है मृत्यु
   सिर्फ ढाई आखर ही का
    पाँच आखर न तुमने लिखे
    न तुम से मिटाए जाएँगे
बीच के पन्ने ऊपर वाले ने
   छोड़े हैं खाली, निखालिस
   लिखो चाहो जो जो, चाहो जैसा जैसा
   लिखना है केवल तुम्हें ही
   कर्म की कलम,
   विवेक की शाई से
   या फिर कहानी, बहा कर खून से
   या तिलक कर दो किसी को
   कुमकुम के, रोली के, चन्दन के
   यही पन्ने कफन में सिल कर जावेंगे
   न रिश्ते, न नाते, न पैंतरे
   और न ही काँधे काम आवेंगे
   नाम के संग संग
   सारे ही इतिहासों में दर्ज किये जावेंगे।
   तो लिखो आज ही से
   प्रेम के ढाई आखर की नित नई कहानी
   सोचो! कितनी वामन है जिन्दगी
   सिर्फ तीन पगों की
   बना लो वामन से विराट जिन्दगी

     रामनारायण सोनी
      17.05.21

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खुले नयन से खुली दृष्टि से, खुले खुले मन के वातायन खुले हाथ से खुले द्वार जो संभव कर दे नया सृजन