जिन्दगी तीन पगों की
जिन्दगी एक किताब है
सिर्फ कुछ पन्नों की
पहले पर लिखा है जन्म
जन्म ढाई आखर ही का
आखिरी पर दर्ज है मृत्यु
सिर्फ ढाई आखर ही का
पाँच आखर न तुमने लिखे
न तुम से मिटाए जाएँगे
बीच के पन्ने ऊपर वाले ने
छोड़े हैं खाली, निखालिस
लिखो चाहो जो जो, चाहो जैसा जैसा
लिखना है केवल तुम्हें ही
कर्म की कलम,
विवेक की शाई से
या फिर कहानी, बहा कर खून से
या तिलक कर दो किसी को
कुमकुम के, रोली के, चन्दन के
यही पन्ने कफन में सिल कर जावेंगे
न रिश्ते, न नाते, न पैंतरे
और न ही काँधे काम आवेंगे
नाम के संग संग
सारे ही इतिहासों में दर्ज किये जावेंगे।
तो लिखो आज ही से
प्रेम के ढाई आखर की नित नई कहानी
सोचो! कितनी वामन है जिन्दगी
सिर्फ तीन पगों की
बना लो वामन से विराट जिन्दगी
रामनारायण सोनी
17.05.21

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