रिश्ता मेरा तुम्हारा
जैसे चाँद से रात का
जैसे अल्फ़ाज से आवाज का
जैसे नदी से धार का
जैसे प्रियतम से मनुहार का!!
हाँ!
देखता हूँ तुम्हें!
जब बन्द आखों से
कैसा अप्रतिम सौन्दर्य हो तुम!!
सुनता हूँ तुम्हें
जब कान बन्द कर के
कैसा एक मधुर सा गीत हो तुम!!
छुअन का अहसास
जैसे समीरण सा मृदुभास
मेरी जीवन बगिया का
जैसे मधुरिम मधुमास हो तुम!!
रामनारायण सोनी
०५.०५.२१

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