सुन ए जिन्दगी!
तुम्हारे पास तो मील के कई पत्थर हैं
कुछ सुडौल सुन्दर से हैं उनमें
याद करना मुझे तुम
अपनी ठोड़ी पर उँगली टिकाए
उन सुन्दर पत्थरों पर बैठ कर
फुसफुसाना अपनी जुबान मैं
और सुन कर मैं...
मैं यहाँ बैठ कर मुस्कुराऊँगा
तुम भी मुस्कुराना मेरे संग संग
रामनारायण सोनी
२६.०७.२१
सुन ए जिन्दगी!
शूलों, भूलों और
परेशानियों के पलों में
इन्हे वो कहीं देख न ले
मेरे माथे पर पड़ी सिलवटों को
छिपा कर कही रख देना
बदले में मुट्ठी भर
मुस्कान बिखेर देना!
बस!
रामनारायण सोनी

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