पीर ही साजन हो गई
मैंने नृत्य करना छोड़ा नहीं
तुमने अपनी वंशी को
विराम दे दिया है
मेरे कान बहरे नहीं हुए
तुम्हारी पदचाप ही
ठहर गई हैं कहीं
आँखें अभी पाथर नहीं हुई
पर देखो रास्ते खुद
रास्ता देख रहे हैं
मेरी कविता मरी नहीं अभी
स्मृतियों के अमर कोष के
वेन्टीलेटर पर जी रही हैं
तुमने अपनी वंशी को
विराम दे दिया है
मेरे कान बहरे नहीं हुए
तुम्हारी पदचाप ही
ठहर गई हैं कहीं
आँखें अभी पाथर नहीं हुई
पर देखो रास्ते खुद
रास्ता देख रहे हैं
मेरी कविता मरी नहीं अभी
स्मृतियों के अमर कोष के
वेन्टीलेटर पर जी रही हैं
कौन सुनेगा मेरी
एक हाथ की ताली
बावरी मीरा नेपथ्य से बोली....
जो मैं ऐसा जानती,
प्रीत किये दुःख होय...
एक हाथ की ताली
बावरी मीरा नेपथ्य से बोली....
जो मैं ऐसा जानती,
प्रीत किये दुःख होय...
पीर ही साजन हो गई
मेरी प्रीत सुहागन हो गई
मेरी प्रीत सुहागन हो गई

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