| मनुहार |
| खड़ी मनुहार में किसकी करों में आरती पुजारन. |
| लटों की बेवजा उलझन ध्वजा से चीर का नर्तन |
| खनकते हाथ के कंगन पायल की मधुर रुनझुन |
| मिलन कि साँझ वेला में सँजोये दीप अर्चन के |
| खड़ी मनुहार में किसकी करों में आरती लेकर पुजारन. |
| तनिक सी आह्टों पर नाचते मृगी से तरल चंचल नयन |
| मृणालिनी टोह में आकुल किसी अभिसार की पहली किरण |
| विसुध किस कल्पना के दोल पर झूले विवश सा मूक मन |
| खड़ी मनुहार में किसकी करों में आरती लेकर पुजारन. |
| मधुर मधुमास भी है और महकता यह मधुर मधुबन |
| पृकृति की ताल में सुर घोलती यह भ्रमर गुंजन |
| फिर है मौन क्यों बुलबुल कि बोझिल आस और तन-मन |
| खड़ी मनुहार में किसकी करों में आरती लेकर पुजारन. |
| रामनारायण सोनी |
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Sunday, 2 September 2012
मनुहार
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- रामनारायण सोनी
- खुले नयन से खुली दृष्टि से, खुले खुले मन के वातायन खुले हाथ से खुले द्वार जो संभव कर दे नया सृजन
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