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Sunday, 2 September 2012

मनुहार

मनुहार
खड़ी मनुहार में किसकी करों में आरती पुजारन. 
लटों की बेवजा उलझन ध्वजा से चीर का नर्तन
खनकते हाथ के कंगन पायल की मधुर रुनझुन 
मिलन कि साँझ वेला में सँजोये दीप अर्चन के
खड़ी मनुहार में किसकी करों में आरती लेकर पुजारन. 
तनिक सी आह्टों पर नाचते मृगी से तरल चंचल नयन
मृणालिनी टोह में आकुल किसी अभिसार की पहली किरण
विसुध किस कल्पना के दोल पर झूले विवश सा मूक मन
खड़ी मनुहार में किसकी करों में आरती लेकर पुजारन. 
मधुर मधुमास भी है और महकता यह मधुर मधुबन
पृकृति की ताल में सुर घोलती यह भ्रमर गुंजन
फिर है मौन क्यों बुलबुल कि बोझिल आस और तन-मन 
खड़ी मनुहार में किसकी करों में आरती लेकर पुजारन. 
रामनारायण सोनी

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