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Tuesday, 4 September 2012

मेरे अंतर में बस जाओ

01.08.2012

तुम मेरे अंतर में बस जाओ 
मैंने चाहा था कुछ लिखना भूल गया मुझको ही
विषयवस्तु केवल तुम थीं शेष शून्य सा शेष रहा
                  तुम अशेष अन्तर में थीं

तब से अब तक तुमको मैंने मुझ में ही ढूँढा है
शायद स्मृतियाँ तुम में भी यह प्रतिबिंब बना देंगी

मेरा विश्वास फलित होता है तुमको भी विश्वास रहा है
आज चुनौती सुनो हमारी टीस हृदय में उपजा देगा

इसीलिये उद् घोष सुनो तुम अंतर अंतर का बंधन है
मैं तेरे अंतर में रम जाऊँ तुम मेरे अंतर में बस जाओ

                     तुम मेरे अंतर में बस जाओ 


01.08.2012                            रामनारायण सोनी 

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