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Saturday, 13 January 2018

ननंद का बीरा आवेगा

(मालवी गीत)
मन तो फूल्यो फूल्यो फरे
   ननंद का बीरा आवेगा।।

बाहर दोडूँ घड़ी घड़ी अने
   बन्दनवार सजइ लूँ
अंगणों लीपी छाबी के ने
  चन्दन चोक पुरइ लूँ।
बीच बीच दिवला की ओली
  कंचन थाळ सजइ लूँ
       मन तो फूल्यो फूल्यो फरे
       ननंद का बीरा आवेगा।।

लाय लगी म्हारा हिरदा मे तो
  छिन छिन भारी हुई गया
पनघट पे म्हारा बासण कूसण
  सगळा रीता रई गया।
सखी सहेली चुहल करे तो
  गाल गुलाबी हुई गया
मन तो फूल्यो फूल्यो फरे
   ननंद का बीरा आवेगा।।
रात चाँदनी लाल हुई जब
  आंख्यां हिंगलू भरइ गयो
बेठ मुंडेरे काळो कौवो
  प्रेम संदेसो दई गयो
नयन अटारी पलक बुहारी
  अंजन कोर धरई गयो
      मन तो फूल्यो फूल्यो फरे
       ननंद का बीरा आवेगा।।

सांस मंजीरा, सांस पखावज
  अंतर बजे तँबूरा रे
आज बावळो होयो हे मन
  खइ के भाँग धतूरा रे।
पाँव पड़ी गइ भँवरी म्हारा
  केसे होय सबूरा रे
      मन तो फूल्यो फूल्यो फरे
       ननंद का बीरा आवेगा।।

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