मौन कितने मौन हो तुम
पर सजगता है तुम्हारी
शोर के भीषण प्रहर में
गहनता तुम में है भारी
मौन तो एक साधना है
यह ईश की आराधना है
साध्य का अनुसंधान है
और सिद्धि का सोपान है
यह ईश की आराधना है
साध्य का अनुसंधान है
और सिद्धि का सोपान है
स्वयं का जब द्वार खोले
व्यष्टि तब साकार होवे
शांति का वह महासागर
त्वरा मन की क्षीण होवे
व्यष्टि तब साकार होवे
शांति का वह महासागर
त्वरा मन की क्षीण होवे
मौन भारी शोर पर है
जब पलटता है स्वयं में
बाँसुरी सुनता मधुर यह
प्रलय के भी उस समय में
जब पलटता है स्वयं में
बाँसुरी सुनता मधुर यह
प्रलय के भी उस समय में

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