निज सरूप को भूला
अब तू सोहं सोहं बोल
सोहं सोहं बोल, अब तू सोहं सोहं बोल
अब तू सोहं सोहं बोल
सोहं सोहं बोल, अब तू सोहं सोहं बोल
एक डाल पर दो पंछी हैं
खट्टे मीठे फल खाता तू
देख रहा भरतार
निज सरूप को भूला,
अब तू सोहं सोहं बोल
सोहं सोहं बोल. अब तू सोहं सोहं बोल
जंगल जंगल परबत परबत
उड़ उड़ हुआ निढाल
काल बाज बन देख रहा है
तुझको नहीं खयाल
निज सरूप को भूला,
अब तू सोहं सोहं बोल
सोहं सोहं बोल, अब तू सोहं सोहं बोल
उड़ उड़ हुआ निढाल
काल बाज बन देख रहा है
तुझको नहीं खयाल
निज सरूप को भूला,
अब तू सोहं सोहं बोल
सोहं सोहं बोल, अब तू सोहं सोहं बोल
झूँठी बाट, घाँट झूँठे सब
सच केवल ओंकार
बाहर जग का ढोल बजे
सुन भीतर की झनकार
निज सरूप को भूला,
अब तू सोहं सोहं बोल
सोहं सोहं बोल, अब तू सोहं सोहं बोल
सच केवल ओंकार
बाहर जग का ढोल बजे
सुन भीतर की झनकार
निज सरूप को भूला,
अब तू सोहं सोहं बोल
सोहं सोहं बोल, अब तू सोहं सोहं बोल
रामनारायण सोनी

No comments:
Post a Comment