रे मन!
चल फिर बालेपन में।
चल फिर बालेपन में।
कैसी रार मची धन जन की
अपने सब कहीं छूट गए हैं
नए नए रिश्ते हैं देश बेगाना
आ! चल चलें बिसरे लोगन में।
रे मन!
चल फिर बालेपन में।
अपने सब कहीं छूट गए हैं
नए नए रिश्ते हैं देश बेगाना
आ! चल चलें बिसरे लोगन में।
रे मन!
चल फिर बालेपन में।
महल दुमहले, कनक अटारी
चकाचौंध सब ओर घणी है
बहरा गए कान चिल्ल पों से
लौटें शीतल गाँव गलियन में
रे मन!
चल फिर बालेपन में।
चकाचौंध सब ओर घणी है
बहरा गए कान चिल्ल पों से
लौटें शीतल गाँव गलियन में
रे मन!
चल फिर बालेपन में।
ऐसी दौड़ लगी जीवन की
फूली साँस थके अँग अँग
पायो नही विश्राम, घड़ी भर
सो ले मैया की गोदन में।
रे मन!
चल फिर बालेपन में।
फूली साँस थके अँग अँग
पायो नही विश्राम, घड़ी भर
सो ले मैया की गोदन में।
रे मन!
चल फिर बालेपन में।

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