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Sunday, 17 June 2018

प्रार्थना न मैं करूँगा

प्रार्थना न मैं करूँगा
क्योंकि प्रेम करता हूँ तुझे मैं
कर चुका समर्पण खुद ही का
मिट गई सब चाहना अब
चाहने वाला ही खुटा-मिटा ही
और बचा न पाने वाला भी
समर्पण मैंने कर ही दिया है प्रेम में 
मिट ही गया चाहने वाला जब 
शेष कहाँ फिर बचा पाने वाला ? 
तुझ में खोना चाहता था 
सो मैं खो गया। 
ऐसा  कि फिर कोई खोज हो 
तो पता बस तू ही हो
वैसे कि जैसे पानी की बूँद 
समुन्दर से निकली, फिर समुन्दर में समा गई
अब से बूँद का पता समुन्दर ही तो  है।

कबीर ने बड़ा अटपटा बोला -
"प्रेम गली अति सांकरी जा में दोउ न समाय।" 
बस तर्कों की संदूक में ताला लगाया 
चाबी फेंक दी दरिया में 
उसने कहा-
बस प्रेम ही किया, प्रेम
आओ! तुम भी चलो! 
परमात्मा बाहें फैलाए खड़ा है।

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