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Sunday, 17 June 2018

बूँद बूँद चू गया

लगता है मेरे प्रेम-घट में
कोई सुराख सा हो गया
सहेजा जिन्दगी भर से
बूँद बूँद कर ही चू गया

मेरी यह प्रीत की दुल्हन
बस झाँकती है अतीत में
जाने कौन घड़ी याद का
सर से दामन सरक गया

अब तो बारिशें खुद ही
उड़ा ले जाती रिमझिम को
वो चाँद भी रोशनी कम
जलन की बौछार कर गया

गुनाह मेरा, मेरे दिल का है
नशा है इश्किया इसका
नहीं पतवार कश्ती में ये
तूफाँ पर भरोसा कर गया

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