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Sunday, 17 June 2018

ये कौन सक्ष है..

ये कौन सक्ष है.. 
जो किसी दुखिया के
आँसू से पसीज गया
ये कौन सक्ष है...
गरीब की झोंपड़ी से
दर्द उधार ले गया।
ये कौन सक्ष है...
जो तुम्हारे बुखार से
इतना तप गया
ये सक्ष कौन है...
जो तुम्हारे पग में लगे
काँटों से बिंध गया।
कौन है जो भिखारी के
तन मन में बैठ गया है
जगत की संवेदनाओं का
व्यवहार करता है
कौन है वह जो पढ़ लेता है
एक बूढ़े के चेहरे की
सिलवटों में से अमुभव के छ्न्द
लोग यही समझते हैं
पागल, आवारा, दीवाना, फुर्सती है
शरारती, अक्खड़ लोगों ने
और भी कई उपाधियाँ खोज ली होंगी
पर वह सक्ष दीनों का हमदर्द है
रंगकर्मी है, लेखक है या कवि है

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